नई दिल्ली : कोरोना वायरस के संबंध में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के विशेषज्ञों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह स्टडी हाल में ही दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में की गई है। स्टडी में बडी तादाद में उन लोगों को शामिल किया गया, जो कोरोना महामारी के संकट से गुजर चुके हैं।
पहले से बीमार युवा और महिलाओं में मृत्युदर अधिक :
विशेषज्ञों ने अपने पहले चरण की स्टडी में जो निष्कर्ष निकाला है, वह इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि अबतक ऐसा माना जा रहा था कि कोरोना वायरस से पीडित युवा की हालत उतनी नहीं बिगडती, जितनी एक बुजुर्ग की बिगड सकती है।
ताजा स्टडी के नतीजों से यह स्पष्ट पता चलता है कि पहले से किसी रोग के कारण बीमार और युवाओं की कोरोना महामारी की वजह से अधिक तादाद में मौत हुई। पहले चरण के अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने स्पष्ट तौर पर यह निष्कर्ष निकाला है कि कॉमरेडिडिटी वाले युवा रोगियों में मृत्यु दर का अधिक खतरा था। वहीं कॉमरेडिडिटी वाली महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मृत्यु दर का अधिक जोखिम था। यह स्टडी गंगा राम अस्पताल में भर्ती 2586 रोगियों में अंतर्निहित समूहों के संघ और कोरोना संक्रमण की प्रगति पर आधारित है।

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सर गंगा राम अस्पताल के शोधकर्ताओं द्वारा गंगाराम के कोविड अस्पताल में भर्ती किए गए 2586 रोगियों पर एक पूर्वव्यापी अध्ययन किया। ये वो मरीज थे जो मधुमेह (DM), उच्च रक्तचाप, क्रोनिक किडनी रोग (CKD) के संबंध का निरीक्षण करने के लिए अक्टूबर 4 ,2020 (पहले चरण) तक अस्पताल में भर्ती थे। इनमें मृत्युदर का जोखिम अधिक पाया गया।
इस अध्ययन को 25 जून को मॉलिक्यूलर एंड सेल्युलर बायोकैमिस्ट्री, स्प्रिंगर नेचर जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अस्पताल के अनुसंधान विभाग की सलाहकार और स्टडी की लेखक डॉ. रश्मि राणा, के मुताबिक हमारे अध्ययन में यह भी पाया गया कि उच्च रक्तचाप के रोगियों को छोड़कर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक थी।
रक्तआधान विभाग के अध्यक्ष और सह लेखकर विवेक रंजन के अनुसार, अध्ययन से यह पता चला है कि कोमार्बिडिटी वाले युवा रोगियों में समान स्वास्थ्य स्थिति वाले बुजुर्गों के मुकाबले कोरोना संक्रमण की गंभीरता का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक था।
मेडिसिन विभाग के सह-लेखक और वरिष्ठ सलाहकार डॉ अतुल गोगिया के मुताबिक अध्ययन में क्रोनिक किडनी रोग के रोगियों में रोग बढ़ने, जटिलताओं और मृत्यु दर के बाद उच्च रक्तचाप और मधुमेह होने का खतरा अधिक पाया गया।”
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आंकडों में अध्ययन :
2586 रोगियों में से, 779 (30.1%) को आईसीयू में प्रवेश की आवश्यकता थी।
जबकि 1807 (69.9%) को आईसीयू में भर्ती नहीं किया गया था।
कोरोना संक्रमण के 2586 भर्ती रोगियों में से 2269 (87.7%) और मृत्यु दर 317 (12.3%) रोगियों में थी।
रेनल साइंस विभाग के चेयरपर्सन और सह लेखक डॉ डी.एस.राणा के अनुसार, कई कोमार्बिडिटी के प्रभाव की तुलना कोरोना संक्रमण की गंभीरता से करने पर, यह पाया गया कि कॉमर्बिडिटी की उपस्थिति से आईसीयू में प्रवेश का अधिक जोखिम होता है। जैसे-जैसे कॉमार्बिडिटीज की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे COVID-19 संक्रमण की गंभीरता का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
वर्तमान अध्ययन में हमने यह भी पाया कि पुराने क्रॉनिक रोगों से पीडित लोगों को आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत अधिक होती है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगी लंबे समय तक उपचार में रखे गए। जैसे-जैसे कॉमरेडिडिटीज वाले मरीजों की तादाद बढी, वैसे ही कोरोना संक्रमण की गंभीरता का जोखिम भी बढता चला गया।
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Nyc