रूमेटाइड अर्थराइटिस, हृदय रोग और मधुमेह से भी पीडित हो सकते हैं खराब Oral Hygiene वाले लोग
नई दिल्ली। Oral Hygiene : हमारे मुंह में जो चल रहा होता है, वह मस्तिष्क की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। उभरते साक्ष्यों के जरिए यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक हमारा मौखिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की सेहत के तार आपस में जुडे हुए हैं।
अगर मौखिक स्वच्छता (Oral Hygiene) के मामले में लापरवाह हैं, तो इस लापरवाही को शीघ्र दूर करने में ही भलाई है क्योंकि मौखिक स्वच्छता से संबंधित विकार ब्रेन हेल्थ को तो प्रभावित कर ही सकते हैं, साथ ही रूमेटाइड अर्थराइटिस, हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर की भी वजह बन सकते हैं। केवल इतना ही नहीं खराब ओरल हेल्थ की वजह से इंसान के मौत का भी जोखिम बढ जाता है। इन सबसे बचने के लिए विशेषज्ञों ने दांत और मसूढों की बेहतरी को प्राथमिकता देने की बात कही है।
नीदरलैंड में ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (University of Groningen) में वृद्ध दंत चिकित्सा (geriatric dentistry) की प्रोफेसर अनीता विज़सर के मुताबिक, लोगों को वास्तव में ओरल हेल्थ और हाईजिन के प्रति जागरुक होने की जरूरत है क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
गंभीर पीरियडोंटल बीमारी कस रही है शिकंजा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर पीरियडोंटल बीमारी (severe periodontal disease) (दांतों को सहारा देने वाले मसूड़ों और हड्डियों की पुरानी सूजन और क्षति) दुनिया भर में 15 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 19 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है। आंकडों के मुताबिक दुनियाभर में 1 अरब से अधिक लोग इन समस्याओं से पीडित हैं। हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि खराब ओरल हेल्थ अल्जाइमर की भी वजह (Poor oral health causes Alzheimers) बन सकता है। हालांकि, इस मामले में और अधिक शोध की आवश्यकता है।
Also Read : National Dementia Helpline : डॉक्टरों की टीम डिमेंशिया मरीजों की करेगी सहायता
ओरल और ब्रेन हेल्थ के आपसी संबंध पर अध्ययन में जुटे हैं वैज्ञानिक
वैज्ञानिक ओरल और ब्रेन हेल्थ के बीच आपसी संबंधोें को लेकर लगातार शोध और अध्ययन में जुटे हैं। वैज्ञानिकों ने दो संभावित कारणों की पहचान की है, जो मसूडों की बीमारी वाले लोगों में अल्जाइमर (Poor oral health causes Alzheimers) की वजह बन सकता है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए बैक्टीरिया और सूजन को जिम्मेदार बताया है।
144 ननों पर किया गया अध्ययन
मसूड़ों की बीमारी, दांतों के झड़ने और अल्जाइमर रोग के बीच संबंध को लेकर चिकित्सकीय प्रमाण हासिल करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों ने उम्रदराज ननों के एक समूह को अध्ययन में शामिल किया। शोधकर्ताओं ने 144 ननों की सेहत की निगरानी की और पाया कि दांतों के गंभीर नुकसान के साथ मनोभ्रंश (dementia) का खतरा उन लोगों की तुलना में 6.4 गुना अधिक था, जिनके दांत कम गिरे थे।
cognitive decline और खराब ओरल हेल्थ के बीच गहरा है संबंध

हाल ही में एक अन्य अध्ययनों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि दांतों के झड़ने की अधिक घटना संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) से जुड़ी होती है। हल्के से मध्यम मनोभ्रंश (dementia) वाले 60 रोगियों पर 2016 में किए गए एक छोटे अध्ययन में पेरियोडोंटाइटिस संज्ञानात्मक गिरावट (periodontitis cognitive decline) के मामले में छह गुना वृद्धि होने का पता चला है।
28 हजार ताइवानी मरीजों पर भी किया गया अध्ययन
वर्ष 2017 में करीब 28,000 ताइवानी रोगियों पर भी एक अध्ययन किया गया था। जिसमें यह पता चला कि 10 या अधिक वर्षों तक पुरानी पीरियडोंटल बीमारी होने से अल्जाइमर रोग का जोखिम 1.7 गुना बढ़ जाता है।
वर्ष 2022 में भी किए गए इसी प्रकार के अन्य 47 अध्ययनों में यह स्पष्ट हो चुका है कि दांतों का नुकसान और खराब मौखिक स्वास्थ्य संज्ञानात्मक गिरावट और मनोभ्रंश दोनों से जुड़े होते हैं। इस तरह के अध्ययन और शोध खराब मौखिक स्वास्थ्य और मनोभ्रंश के बीच संबंध की एक उभरती हुई तस्वीर पेश करते है लेकिन पूरी तरह किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए अभी और कई कारण हैं, जिनपर और अधिक अध्ययन और शोध करने की आवश्कता है।
मुंह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया मस्तिष्क को भी कर सकते हैं संक्रमित
अध्ययन में यह पता चला है कि आमतौर पर हमारे मुंह में विकसित होने वाले हानिकारक बैक्टीरिया मस्तिष्क को भी संक्रमित कर सकते हैं। जिसके कारण अल्जाइमर रोग में न्यूरोडीजेनेरेशन (Neurodegeneration) की संभावना बढ सकती है।
साइंस एडवांसेज में प्रकाशित 2019 के एक अध्ययन में यह बताया गया है कि पी. जिंजिवलिस बैक्टीरिया (P. gingivalis bacteria) का डीएनए, मसूड़ों की बीमारी में एक प्रमुख रोगज़नक़ है। अल्जाइमर रोगियों के मस्तिष्क शव परीक्षण में इस बैक्टीरिया की पुष्टि भी हुई थी। इसके अलावा संभावित रूप से अल्जाइमर रोग निदान वाले लोगों के मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid) में जीवाणु डीएनए की भी मौजूदगी पार्ई गई। पी. जिंजिवलिस बैक्टीरिया के जहरीले एंजाइम अल्जाइमर रोगियों के मस्तिष्क में भी पाए गए।
Also Read : Alzheimer : आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते हैं बेहतर प्रबंधन
चूहों पर किए गए अध्ययन में भी हुआ खुलासा
वैज्ञानिकों ने इस मामले को समझने के लिए चूहों पर भी एक प्रयोग किया था। उन्होंने चूहों को मुंह के माध्यम से बैक्टीरिया से संक्रमित किया। जिसके बाद उन्होंने चूहों के मस्तिष्क में पी. जिंजिवलिस डीएनए की उपस्थिति के साथ अमाइलॉइड बीटा सेलुलर अपशिष्ट (amyloid beta cellular waste) (अल्जाइमर का एक लक्षण) की मौजूदगी का भी पता लगाया।
शोधकर्ता पी. जिंजिवलिस से संक्रमित चूहों में जीवाणु एंजाइमों को रोकने में सक्षम थे, जिससे अमाइलॉइड बीटा उत्पादन और न्यूरोइन्फ्लेमेशन (Amyloid beta production and neuroinflammation) कम हो गया। हालांकि, उन जीवाणु एंजाइमों को लक्षित करने वाला एक हालिया नैदानिक परीक्षण विफल रहा और खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भविष्य के परीक्षणों पर भी रोक लगा दी।
दिमाग तक कैसे पहुंचता है पेरियोडॉन्टल बैक्टीरिया नहीं पता लगा पाए हैं वैज्ञानिक
पेरियोडॉन्टल बैक्टीरिया दिमाग की केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central nervous system) तक कैसे घुटपैठ करते हैं? यह शोधकर्ताओं के लिए अभी तक एक पहेली ही बनी हुई है। जबकि, रक्त में या परिधीय तंत्रिकाओं के साथ परिसंचरण (circulation with peripheral nerves) के माध्यम से मस्तिष्क तक इनकी पहुंच का मार्ग शोधकर्ताओं को ज्ञात है।
[table “9” not found /][table “5” not found /]