Aiims विशेषज्ञ ने 3 घंटे की जटिल सर्जरी कर Rare disease से उबारा
नई दिल्ली।टीम डिजिटल : देश के प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थानों में शुमार दिल्ली एम्स (Delhi Aiims) के विशेषज्ञ दुर्लभ रोग (rare disease) से भी मरीज को उबार लेते हैं। एम्स विशेषज्ञ अपनी चिकित्स्कीय कार्यकुशला का प्रदर्शन कर नामुमकिन को भी कई बार मुमकिन कर देते हैं। यही कारण है, बीमारी की पीडा से निराश देश के विभिन्न राज्यों से मरीज जीवन की आशा लेकर दिल्ली एम्स में आते हैं। इस बार एम्स विशेषज्ञ ने तीन महीने के बांग्लादेशी बच्चे अरहत आयदीन की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है।
Rare disease ‘जायंट ओसीसीपिटल एन्सेफेलोसेले’ से पीडित था बच्चा

विशेषज्ञों के मुताबिक शिशु अपने जन्म के समय से ही दुर्लभ बीमारी (rare disease) ‘जायंट ओसीसीपिटल एन्सेफेलोसेले’ (giant occipital encephalocele) से पीडित था। इस बीमारी में मस्तिष्क किसी थैली की तरह फैल जाती है। यह थैली बच्चे के सिर से भी बडे आकार की हो चुकी थी। डॉक्टरों के मुताबिक समय रहते बच्चे को उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत भी हो सकती थी।
तीन घंटे की जटिल सर्जरी के बाद मिली सफलता
जानकारी के मुताबिक बच्चे की सर्जरी आसान नहीं थी और जोखिम भी था। तीन घंटे तक जटिल सर्जरी को अंजाम देते हुए डॉक्टरों ने न केवल बच्चे के मस्तिष्क के उभरे हुए थैलीनुमा अतिरिक्त हिस्से को हटाया बल्कि उसके सिर को सही आकार भी प्रदान किया।
थैली फटने का था खतरा

एम्स में ‘न्यूरोसर्जरी’ विभाग के प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार गुप्ता (dr. deepak kumar gupta aiims) के मुताबिक अगर बच्चे का उपचार नहीं किया जाता तो उसके सिर से जुडी थैली फट सकती थी। इससे बच्चे को मेनिनजाइटिस संक्रमण होने का खतरा था। डॉ. गुप्ता के अनुसार, ‘बच्चे की खोपड़ी के पिछले हिस्से में काफी सूजन था।
जिसके कारण बच्चे को काफी परेशानी हो रही थी। दूध पिलाने के साथ उसकी देखभाल के कार्यों में भी घरवालों को कठिनाइयों का सामना करना पड रहा था। सबसे खास बात यह थी कि मस्तिष्क के सूजन वाले ऊतकों के अचानक फटने का डर हमेशा बना हुआ था। डॉक्टर के मुताबिक बच्चे के पिता आबिद आजाद ने कुछ महीने पहले उनसे संपर्क किया था।
जांच के बाद बनाई गई सर्जरी की योजना
डॉक्टर गुप्ता के मुताबिक, बच्चे की स्थिति की विस्तृत तौर पर मूल्यांकन करने के बाद उन्होंने सर्जरी की योजना तैयार की। 12 दिसंबर को बच्चे की सर्जरी की गई और इस दौरान मस्तिष्क के उभरे हुए गैर-जरूरी हिस्से को काटकर अलग किया गया। सर्जरी के दौरान मस्तिष्क के सामान्य ऊतकों को किसी प्रकार का नुकसान न हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती गई।
सर्जरी के दौरान ही विशेषज्ञ ने ‘एक्सपेंसाइल क्रैनियोप्लास्टी’ की। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी थी कि समय के साथ उसके शारीरिक विकास के साथ मस्तिष्क को भी बढने के लिए जगह मिले।
डॉक्टर ने कहा कि सर्जरी के छह दिन बाद बच्चा अरहत आयदीन ठीक है और सोमवार को उसे छुट्टी मिलने की उम्मीद है।
Read : Latest Health News|Breaking News |Autoimmune Disease News |Latest Research | on https://caasindia.in | caas india is a Multilanguage Website | You can read news in your preferred language. Change of language is available at the beginning of the post (before the highlights). |