1 से 7 सितंबर तक मनाया जाता है National Nutrition Week
नई दिल्ली : National Nutrition Week 2023 : पिछले 50 वर्षों के दौरान जिंदगी की भागमभाग बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही भोजन में न्यूट्रिशन (Nutrients) की कमी आती जा रही है। प्रोसैस्ड फूड, फास्ट फूड और डिब्बाबंद फूड हमारी व्यस्त जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैंं। जो शरीर और सेहत के लिए ये हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं। पोषण (Nutrients) की कसौटी पर ऐसा भोजन बिल्कुल भी खरा नहीं उतर रहा।
फल, दूध, अनाज, ड्राई फ्रूट, दालों और और सब्जियों में जो पोषक तत्वों की जितनी मात्रा आज से चार पांच दशक पूर्व होती थी, उसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन द्वारा जारी 1989 और 2017 की रिपोर्ट के अनुसार अनाज, दालों, फल व सब्जियों में विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स और कार्बोहाइड्रेट आदि की मात्रा में कमी पाई गई है। यह कमी 6 से लेकर 20 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। भोजन में पोषक तत्वों (Nutrients) की कमी के चलते न केवल हमारी शारीरिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
बच्चों की सेहत पर दिख रहा है असर
बच्चों की सेहत पर इसका स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। स्वाद के चक्कर में पोषण (Nutrients) की लगातार अनदेखी हो रही है। अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार लेना आवश्यक है लेकिन स्वादिष्ट भोजन संतुलित और पोषक हो, यह बिलकुल भी जरूरी नहीं है। यदि आप घर का खाना नहीं खा रहे हैं तो अधिक संभावना इस बात की है कि आपके भोजन में वसा, चीनी, नमक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो और मिनरल्स, विटामिन और प्रोटीन की मात्रा कम हो। हमारे दैनिक आहार में ये सभी तत्व भोजन में संतुलित मात्रा में होने चाहिएं।
आयु और ऋतु के मुताबिक करें भोजन

आयुर्वेद के के मुताबिक व्यक्ति को भोजन अपनी प्रकृति, आयु और ऋतु के अनुसार करना चाहिए ताकि खाया हुआ भोजन सेहत के लिए तो फायदेमंद हो और आसानी से पच जाए। सुबह उठते ही हमें सादा या नींबू का पानी पीना चाहिए। अपने दिन की शुरुआत हमें चाय कॉफी के बजाय सूप और जूस से करनी चाहिए।
नाश्ते को कभी भी हमें स्किप नहीं करना चाहिए क्योंकि प्रातः काल हमारी अग्नि प्रबल होती है । शरीर में अग्नि तत्व की प्रधानता के कारण हम जो भी कुछ खाएंगे वह जल्दी पच जाएगा । इसलिए नाश्ते में हम दूध, चपाती, जूस, फल व अंकुरित अनाज और दालों का प्रयोग कर सकते हैैं। लंच में दाल, चावल, चपाती और सब्जी के साथ दही या छाछ का प्रयोग कर सकते हैं।
चपाती बनाने के लिए गेहूं के साथ अन्य अनाजों और दालों का आटा मिक्स करें ताकि भोजन अधिक पौष्टिक और सुपाच्य हो जाए। चना, जौ, जई, बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का, आदि अनाजों को गेहूं के साथ मिक्स किया जा सकता है।
जिन व्यक्तियों को गेहूं से एलर्जी है वे गेहूं के बजाय मिलैट्स का प्रयोग करें। लंच के समय तक पित्त की प्रधानता रहने के कारण हम गरिष्ठ भोजन पर्याप्त मात्रा में कर सकते हैं। दही या छाछ का प्रयोग लंच तक कर सकते हैं। शाम के समय जूस, सूप, दूध, चाय कॉफी के साथ फल, पोहा, उपमा, मूंगफली, मखाना और अलसी के बीजों का प्रयोग कर सकते हैं।
रात के समय तक शरीर में कफ की प्रधानता हो जाने से अग्नि मंद हो चुकी होती है, अतः डिनर में हल्का व सुपाच्य भोजन लेना चाहिए जिसमें हरी सब्जियां, चपाती, चावल, मूंग की दाल वगैरह शामिल हों। जिन लोगों का वजन अधिक हो वे रात का खाना स्किप कर सकते हैं। ऐसे लोगों को सब्जियों के सूप का प्रयोग अवश्य करना चाहिए ताकि उनकी पाचन क्रिया दुरुस्त रहे।
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ऐसा होना चाहिए आपका आहार
सर्दियों में सरसों, बथुआ, मेथी व चने के साग का प्रयोग अच्छा पोषण (Nutrients) प्रदान करता है। वहीं गर्मी में घिया, तोरी, टिंडा, परवल, कुंदरू से भी अच्छा पोषण मिलता है। पालक तो पूरे वर्ष मिलने वाला साग है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में मिनरल्स मौजूद होते हैं। फलों में नाशपाती, आलू बुखारा, आड़ू, आम वगैरह गर्मी के मौसम में प्रयोग करने चाहिएं। जबकि, अंगूर, चीकू, संतरा, सर्दी के मौसम में। सेब, केला, मौसमी का प्रयोग पूरे साल किया जा सकता है। जिन बच्चों को दूध का स्वाद पसंद नहीं है, उन्हें मैंगो शेक या बनाना शेक देना चाहिए।
भोजन में खनिज लवणों और डायटरी फाइबर की अपर्याप्त मात्रा के कारण मधुमेह, मोटापा, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, कैल्शियम की कमी, गुर्दों और दिल में होने वाले जीवन शैली से संबंधित रोगों के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मोटे अनाज (Fat grains) में मौजूद पोषणीय एवं औषधीय गुणों के आधार पर इन्हें भविष्य के भोजन के रूप में देखा जा रहा है। मिलेट (मोटे अनाज) जीवन शैली से संबंधित रोगों से बचाव, खाद्य सुरक्षा और पोषण (Nutrients) की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस वर्ष को इंटरनेशनल मिलेट इयर (अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष) घोषित किया है।
बीमारियों की रोकथाम में कारगर होते हैं मोटे अनाज

बढ़ती आबादी, खास तौर पर युवाओं व बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप आदि जीवनशैली से संबंधित बीमारियों की रोकथाम में मोटे अनाजों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। गेहूं व चावल की तुलना में मोटे अनाज में भरपूर मात्रा में पोषक (Nutrients) तत्व मौजूद होते हैं। इनके प्रयोग से पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। गेहूं और चावल की तुलना में मोटे अनाजों में मिनरल्स, विटामिन, एंजाइम और फाइबर अधिक मात्रा में पाई जाती है।
मोटे अनाजों (Fat grains) में कैल्शियम, बीटा-कैरोटीन, नाइयासिन, विटामिन बी -6, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, जिंक आदि खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदों, सांवा, आदि शामिल हैं। भारत में, लगभग 17 मिलियन हेक्टेयर में मोटा अनाज उगाया जाता है, जो कि 18 मिलियन टन के वार्षिक उत्पादन के साथ देश के सकल अन्न भंडार का 10 प्रतिशत है।
इस तरह फायदेमंद हैं मोटे अनाज
मोटे अनाजों में प्रमुख बाजरा पेट को दुरुस्त रखता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। पाचन बेहतर होने के कारण वजन कंट्रोल में रहता है। वहीं, रागी में अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है और यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। ज्वार वजन को कंट्रोल में रखने के साथ कब्ज को भी दूर करता है। कैल्शियम का अच्छा स्रोत होने के कारण यह हड्डियों को मजबूती देता है। इसमें मौजूद आयरन एनीमिया को दूर करने में मदद करता है। वहीं, मक्का में विटामिन-ए और फॉलिक एसिड पाया जाता है।
यह कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल के मरीजों को फायदा पहुंचाता है। मोटे अनाज में शामिल ज्वार वजन को कंट्रोल में रखने के साथ कब्ज को भी दूर करता है। कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूती देता है। इसमें मौजूद आयरन एनीमिया को दूर करने में मदद करता है। वहीं, मक्का में विटामिन-ए और फॉलिक एसिड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल के मरीजों को फायदा पहुंचाता है।
लौह त्तत्व से भरपूर है रागी
रागी भारतीय मूल का अनाज है और इसमें 344 मिग्रा/100 ग्राम कैल्शियम होता है। दूसरे किसी भी अनाज में कैल्शियम की इतनी अधिक मात्रा नहीं पाई जाती है। रागी में लौह तत्त्व की मात्रा 3.9मिग्रा/100 ग्राम होती है, जो बाजरे को छोड़कर सभी अनाजों से अधिक है। रागी खाने की सलाह मधुमेह के रोगियों को दी जाती है। पारंपरिक रूप से रागी का इस्तेमाल खिचड़ी जैसे आहार के रूप में किया जाता है।
आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है बाजरा
बाजरे के 100 ग्रा. खाद्य हिस्से में लगभग 11.6 ग्रा. प्रोटीन, 67.5 ग्रा. कार्बोहाइडेट, 8 मि.ग्रा लौह तत्व और 132 माइक्रोग्राम कैरोटीन मौजूद होता है, जो हमारी आँखों की सुरक्षा करता है।
पोषक तत्वों से भरपूर ज्वार
ज्वार नाइजीरिया का प्रमुख भोजन है। ज्वार का औद्योगिक उपयोग अन्य मोटे अनाजों की तुलना में अधिक होता है। इसका उपयोग शराब उद्योग, डबलरोटी उद्योग व व्यापारिक रूप से शिशु आहार बनाने वाले उद्योगों में भी किया जाता है। इसमें 10.4 ग्रा. प्रीटीन, 66.2 ग्रा. कार्बोहाइड्रेट, 2.7 ग्रा. रेशा और अन्य सूक्ष्य तथा वृहत पोषण तत्त्व मौजूद होते हैं।
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गर्भावस्था में महत्वपूर्ण है कैल्शियम
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं में कैल्शियम की कमी होने से बच्चों की हड्डियां कमजोर हो जाती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान अपर्याप्त कैल्शियम लेने से मां का स्वास्थ्य प्रभावित हो जाता है। इस दौरान मां की हड्डियों के कैल्शियम का इस्तेमाल भ्रूण के विकास और स्तन दुग्ध के निर्माण में होने लगता है। कैल्शियम की कमी के कारण मांं की संचरण प्रणाली पर बुरा असर पडता है और उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा होती है। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को भोजन में ज्वार, बाजरा, रागी व मक्का देने से गर्भावस्था से उत्पन्न उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेम्प्सिया की घटनाओं में कमी आती है।
इन बातों का रखें ख्याल
बाजार में उपलब्ध फूड सप्लीमेंट्स सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, अतः पोषण (Nutrients) की कमी को दूर करने के लिए फूड सप्लीमेंट्स के बजाय ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मोटे अनाज और मौसमी फल और सब्जियों का प्रयोग करें। भोजन को धीमी आंच पर पकाएं क्योंकि अधिक आंच में भोजन के पोषक तत्व (Nutrients) अधिक मात्रा में नष्ट होते हैं।
बाजार से लाने के बाद फल, सब्जियां, दाल, अनाज, मसालों व तेलों को जितना जल्दी हो सके प्रयोग कर लें क्योंकि लंबे समय तक रखे रहने से इनके पोषक तत्व कम होते चले जाते हैं। सेब, अमरूद जैसे फलों को छीलने की बजाय धोकर खाएं क्योंकि इनके छिलकों में अधिकतम पोषक तत्व विद्यमान होते हैं। इसी तरह घिया, तोरी व सीताफल जैसी सब्जियों को भी बिना छीले प्रयोग करें।
National Nutrition Week : हमारे आहार से कम क्यों हो रहे हैं पोषक तत्व, जानिए कारण
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