Friday, April 4, 2025
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Generic Medicine लिखने के मुद्दे पर एनएमसी और आईएमए आमने-सामने

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Generic Medicine से संबंधित नए नियमों को टालने की मांग

नई दिल्ली। टीम डिजिटल :  Generic Medicine लिखने के मुद्दे पर एनएमसी और आईएमए आमने-सामने-  राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा सभी चिकित्सकों को हाल में जारी किए गए नए नियमों से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन चिंता में है। नए नियमों के मुताबिक सभी चिकित्सकों को मरीजों को जेनेरिक दवाएं (Generic Medicine) लिखनी होंगी। ऐसा नहीं करने वाले चिकित्कों को दंडित किया जाएगा। इसके तहत उनकी प्रैक्टिस लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है। डॉक्टरों की संस्था आईएमए ने इन नियमों को फिलहाल टालने की मांग की है।

नए नियमों पर उठाया सवाल

आईएमए ने भारत में निर्मित दवाइयों के मानकों को लेकर चिंता व्यक्त किया है। संस्था का कहना है कि इनमें 0.10 प्रतिशत से भी कम गुणवत्ता जांच दर है। संस्था ने अपने बयान में कहा है कि अगर चिकित्सक ब्रांडेड दवा नहीं लिख सकते तो इस तरह की दवाइयों का लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए।

Generic Medicine
Generic Medicine लिखने के मुद्दे पर एनएमसी और आईएमए आमने-सामने | Photo : freepik

यह हैं नए नियम

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने अपने पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर्स (चिकित्सक) के पेशेवर आचरण से जुड़े नियमों में यह कहा है कि सभी चिकित्सकों के लिए मरीजों को जेनरिक दवा (Generic Medicine) लिखना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने वाले चिकित्सकों को दंडित किया जाएगा। इसके तहत उनकी प्रैक्टिस लाइसेंस भी रद्द कर दी जाएगी।

आईएमए ने ब्रांडेड दवाइयों की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

आईएमए ने कहा है कि, ‘‘जेनेरिक दवाइयों की राह में सबसे बडी बाधा उसकी अनिश्चित गुणवत्ता है। देश में गुणवत्ता नियंत्रण की निगरानी प्रक्रिया बेहद कमजोर है। दवाइयों की गुणवत्ता की व्यावहारिक रूप से कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में गुणवत्ता के बारे में आश्वस्त हुए बगैर दवाइयां लिखना मरीज के स्वास्थ्य के साथ सीधे खिलवाड साबित हो सकता है।

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जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता पर आश्वस्त करे सरकार

आईएमए ने अपने बयान में यह कहा है कि सरकार को जेनेरिक दवाइयोें की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त करना चाहिए। जबतक ऐसा नहीं किया जाता, तबतक नए नियमों को टाला जाना चाहिए। आईएमए ने सलाह दी है कि एनएमसी के जरिये आगे बढ़ने के बजाय सरकार को फार्मा (दवा कंपनियों का) मार्ग अपनाना चाहिए। वहीं, सभी ‘ब्रांडेड’ दवाइयों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए। आईएमए के मुताबिक सरकार ‘ब्रांडेड’ और ‘ब्रांडेड जेनेरिक’ जैसी कई श्रेणियों वाली दवाइयों को अनुमति देती है। आईएमए ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि वे ‘‘एक दवा, एक गुणवत्ता, एक मूल्य’’प्रणाली अपनाएं।जिसमें सभी ब्रांड का एक ही मूल्य तय हो।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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