उठते-बैठते अगर हड्डियों से आए कट-कट की आवाज तो हो जाएं सतर्क
Osteoporosis Treatment : हड्डियां शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वह ढांचा है, जिसमें समस्या होने पर पूरे शरीर का तानाबाना ही बिगड सकता है। चाहे शरीर का वजन हो या संतुलन काफी हदतक हड्डियों पर ही निर्भर होता है। हड्डियों में आने वाली परेशानी आपके आवागमन को बाधित कर सकती है। जिसका असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड सकता है। इसलिए हड्डियों के स्वास्थ्य पर विशेष जागरुकता बरतने की जरूरत रहती है।
आमतौर पर यह धारणा है कि हड्डियों को बेहतर रखने के लिए शरीर में कैल्शियम की मात्रा सही होनी चाहिए लेकिन यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है। हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम के साथ कई अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा शारीरिक निष्क्रियता से भी बोन हेल्थ पर असर पडता है। आज विश्व ऑस्टियोपोरोसिस डे (world osteoporosis day) के अवसर पर हम आपको इसके संबंध में आवश्यक जानकारी दे रहे हैं। जिससे इस स्वास्थ्य समस्या से बचने में आपको मदद मिल सकती है।
क्या है Osteoporosis
ऑस्टियोपोरोसिस बोन्स से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें हड्डियां खोखली होकर कमजोर हो जाती है। इस हेल्थ कंडिशन में बोन भुरभुरी हो जाती है। शुरूआती चरणों में इस बीमारी से पीडित ज्यादातर लोगोें में किसी तरह के लक्षण प्रकट नहीं होते हैं। ज्यादातर मामलों में इस बीमारी का पता तब चलता है जब, हल्की चोट की वजह से आश्चर्यजनक रूप से हड्डियों में फ्रैक्चर होना शुरू हो जाता है।
लक्षण :
झुकी हुई पीठ, पीठ में दर्द, लंबाई छोटी होना, कमजोर पकड़ और हड्डियों के टूटने का जोखिम
ऑस्टियोपोरोसिस में होने वाली समस्या से कैसे बचें?

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) से होने वाली मुश्किलों से बचने का सबसे बेहतर उपाए है, इसका शीघ्र डायग्नोस होना और तत्काल उपचार शुरू करना। जिन लोगों की हड्डिया कमजोर है या जिन्हें हड्डियों की कोई समस्या है, तो ऐसे लोगों को कुछ अंतराल पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराते रहना चाहिए।
70 से अधिक उम्र के पुरुष, 65 से अधिक उम्र की महिलाएं, नाजुक फ्रैक्चर वाले वयस्क, कुछ दवाएं (जैसे स्टेरॉयड) लेने वाले, नियमित धूम्रपान करने वाले या शराब पीने वाले, और हड्डियों के घनत्व को कम करने वाली स्थितियों वाले लोग (जैसे प्रारंभिक रजोनिवृत्ति या हाइपरथायरायडिज्म) वाले लोगों को बोन डेंसिटी टेस्ट जरूर करवाते रहनी चाहिए।
रोकथाम
ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम (Osteoporosis Treatment) या प्रिवेंसन के लिए पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन खाना, धूम्रपान से बचना, शराब को सीमित करना और पैदल चलने के साथ नियमित व्ययाम करने चाहिए। अगर ऑस्टियोपोरोसिस का पता चल चुका है तब, घर और बाहर गिरने के जोखिम को कम करने के उपाए करने चाहिए।
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अपनी निर्धारित ऑस्टियोपोरोसिस दवाएं भी नियमित रूप से लेनी चाहिए। यदि संतुलन की समस्या हो रही है तो छडी या वॉकर का उपयोग करने में कोताही न बरतें। मरीजों को अपने जूते और चप्पल की ग्रिप को लेकर भी जागरुक रहना चाहिए। वहीं बेहद चिकने फर्श पर आवागमन करने से भी बचना चाहिए।
विशेषज्ञ की राय
वरिष्ठ होमियोपैथी विशेषज्ञ डॉ. कुमारी नीता के मुताबिक, हड्डियों की कमजोरी के चलते बुखार, झुक कर बैठना या उठना जैसे कारण तनाव और बोन फ्रैक्चर की वजह बन सकते हैं। शरीर नियमित रूप से हड्डियों में मौजूद सेल्स की मरम्मत करता रहता है लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
खास बात यह भी है कि उम्र के साथ हड्डियों के निर्माण की यह प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। कई बार स्टेरॉयड जैसी दवाईयों के इस्तेमाल की वजह से और थायरॉयड हारमोन की खुराक का उपयोग भी ओस्टियोपोरोसिस के विकास की वजह बन सकता है। इसके अलावा शारीरिक मेहनत की कमी, अत्यधिक मात्रा में शराब और तंबाकू का सेवन भी इस बीमारी के जोखिम को बढा देता है।
शरीर में बनाए रखें कैल्शियम और विटामिन डी का स्तर
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) से बचने के लिए जरूरी है कि आपके शरीर में कैल्शियम के साथ विटामिन डी की भी पर्याप्त मात्रा हो। अगर विटामिन डी कम है तो शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में समस्या होगी। नतीजतन, शरीर में कैल्शियम की कमी भी हो जाएगी। ऐसे में आपकी हड्डिया कमजोर हो जाएगी और बोन डेंसिटी प्रभावित होगा।
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नियमित वेट-बेयरिंग व्यायाम हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर विकल्प है। बच्चों को छोटी उम्र से ही नियमित व्यायाम करने की आदत डालें। उन्हें खेलने के लिए पर्याप्त समय दें। खेलने के समय में कटौती कर आप उन्हें अच्छी डिग्रियां लेने को तो जरूर प्रेरित कर सकते हैं लेकिन शारीरिक निष्क्रियता की वजह से होने वाली बीमारियां उनके पूरे जीवन को प्रभावित कर देंगी। उस समय आप अपने बच्चे की सहायता के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। इसलिए आवश्यक है कि बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त समय और सहयोग दें।
होमियोपैथी में है Osteoporosis Treatment
डॉ. कुमारी नीता के मुताबिक, होम्योपैथी बिना किसी दुष्प्रभाव के उपचार (Osteoporosis Treatment) करने में सहायक है। होम्योपैथिक दवाएं जैसे कैलकेरिया फॉस्फोरिका हड्डियों में कैल्शियम की जमावट बढ़ाने, पचे हुए भोजन से कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों के सिंग्रेशन को बढ़ाने, और हड्डी की घनता बढ़ाने में मदद करती है। जबकि, सिम्फाइटम ऑफिसिनाल भी इस बीमारी में उपयोग होने वाली एक बेहतर दवा है। फ्रैक्चर से होने वाले गंभीर दर्द के उपचार के लिए आर्निका मोंटाना और हाइपेरिकम परफोलिएटम जैसी दवाइयों का उपयोग किया जाता है। ध्यान रखें कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी दवा का उपयोग करना जोखिम भरा भी साबित हो सकता है।