Safdarjung Hospital में आयोजित कार्यशाला में बताया चिकित्सकीय कानूनी जांच का महत्व
नई दिल्ली। सफरदजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने ‘यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) सर्वाइवर की चिकित्सकीय कानूनी जांच के लिए दिशानिर्देश’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित किया। अस्पताल में यह आयोजन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के योजना एवं प्रशासन विभाग की उप माहानिदेशक डॉ. अमिता बाली और सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वंदना तलवार ने किया। इस मौके पर सभी अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक मौजूद रहे।
इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. तलवार ने यौन उत्पीड़न सर्वाइवर के मामले में मनोसामाजिक परामर्श की आवश्यकता पर जोड देते हुए कहा कि घटना के बाद पोस्ट ट्रॉमैटिक सिंड्रोम की घटनाएं अधिक होती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सखी, वन स्टॉप सेंटर, यौन उत्पीड़न से बचे लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए है।
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यौन उत्पीडन यौन उत्पीड़न सर्वाइवर के मामले में अहम है स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका

डॉ. अमिता बाली ने यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) सर्वाइवर की जांच के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन बार-बार किया जाना चाहिए। आयोजन अध्यक्ष के रूप में डॉ बिंदू बजाज ने गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी यौन उत्पीड़न सर्वाइवर के संपर्क में सबसे पहले आते हैं। जिसके कारण इस मामले में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सफदजरंग अस्पताल के वन स्टॉप सेंटर की नोडल अधिकारी और कार्यशाला की आयोजन सचिव प्रो. मोनिका गुप्ता ने प्रतिनिधियों को सुरक्षित किट के बारे में जानकारी दी।
विभिन्न राज्यों के 80 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया

कार्यशाला में भारत के 10 से अधिक राज्यों के 80 प्रतिनिधियों (डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों) ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने मेडिको लीगल परीक्षा,कानूनी निहितार्थ, ओएससी जैसे मुद्दों से संबंधित विचार-मंथन सत्र में शामिल हुए। इस दौरान डॉ. विनीता ने वन स्टॉप सेंटर के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ कुशवाहा ने नमूना संग्रह और उससे जुडी सावधानियों के बारे में जानकारी दी।
डॉ वर्मा ने मेडिको कानूनी मुद्दों से जुडी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शेयर किया। जबकि, डॉ रेखा ने एसटीआई के लिए प्रोफिलैक्सिस और उपचार के बारे में जानकारी दी। नर्सिंग अधिकारी सीमा राठौड़ ने लोगों को संबोधित करते हुए यौन उत्पीड़न सर्वाइवर के मामले में नर्स की भूमिका को उजागर किया। इसके अलावा डॉ. अनुराधा ने POCSO अधिनियम के बारे में लोगों को महवपूर्ण जानकारी दी परामर्शदाता लक्ष्मी ने इस मौके पर एक नाबालिग यौन उत्पीड़न सर्वाइवर के मुद्दों और परामर्श देने के तरीकों पर प्रकाश डाला।
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