Autoimmune Rheumatic Diseases: पीडित मरीजों के उपचार में होने वाली समस्याओं पर नुक्क्ड सभाएं
नई दिल्ली।टीम डिजिटल : Autoimmune Rheumatic Diseases : मरीजों की डाइरेक्टी के लिए ऑनलाइन सर्वे – युवाओं में होने वाली बीमारियां हैं। इन बीमारियों का स्थाई उपचार नहीं है लेकिन नियमित उपचार विधियों से इनके लक्षणों को नियंत्रित कर मरीज के जीवन की गुणवत्ता को सुधारना संभव है। देखा गया है कि ऐसी बीमारियों को लेकर सामाजिक स्तर पर जागरूकता की बेहद कमी है और इससे बीमारियों की पहचान और मरीजोें का उपचार दोनों ही प्रभावित हो रहा है।
ऐसे में जरूरत है कि पहले तो लोगों को जागरूक किया जाए और इसके साथ ही इन बीमारियों के उपचार की राह को भी आसान बनाई जाए। इन गतिरोधों को दूर करने में सामाजिक स्तर पर पहल तो जरूरी है ही, साथ ही सरकारी स्तर पर भी ऐसी बीमारियों से पीडित मरीजों के उपचार के लिए प्रभावी इंतजाम भी करने की उतनी ही जरूरत है। इन बीमारियों का उपचार इसलिए भी मुश्किल साबित हो रहा है क्योंकि ये काफी महंगी है। विशेषज्ञों की मानें तो समय से उचपार मिलने से मरीजों की जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित होने से रोकने के साथ उन्हें इससे होने वाली विकलांगता से भी बचाया जा सकता है।
Autoimmune Rheumatic Diseases के लिए नहीं है इंशोरेंस पॉलिसी
अन्य बीमारियों की तरह इन बीमारियों के उपचार के लिए देश में इंशोरेंस पॉलिसी कवर नहीं दी जाती है। मरीजों के नियमित उपचार में यह सबसे प्रमुख बाधाओं में से एक है। इन बीमारियों के लक्षणों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के लिए Biologics injection की बडी भूमिका है लेकिन इनकी कीमत ही इतनी अधिक है कि एक आम मरीज को इस थेरेपी को करवाने से पहले 100 बार सोचना पडता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इंशोरेंस पॉलिसी न होने की वजह से AIRDs के मरीज बहुत कुछ गंवाकर महंगे दरों पर उपचार प्राप्त करने को मजबूर हैं। ऐसे मरीजों की राह थोडी आसान जरूर हो जाती अगर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कम दर पर मरीजों को यह इजेक्शन मुहैया करवाया जाता लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा रहा।
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मरीजों की डायरेक्ट्री बनाने के लिए Caas India Foundation ने शुरू की पहल
ऑटोइम्यून रूमेटिक डिजीज से पीडित मरीजों की संख्या कितनी है, यह आंकडा देश में उपलब्ध नहीं है। जब आंकडों की बात आती है तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमानित आंकडों से ही काम चलाया जाता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि ऐसे मरीजों के आंकडों को हासिल करने के लिए प्रयास किए जाएं। इन्हीं सभी बातों का ध्यान रखते हुए Caas India Foundation ने AIRD 2023 सर्वे की शुरूआत की है। जिसका उद्देश्य मरीजों के आंकडों का पता लगाने के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक हालात का भी पता लगाना है। संस्था ने बीते शुक्रवार को इस ऑनलाइन सर्वे की शुरूआत की है। इन तीन दिनों में ही 100 से ऊपर की संख्या में Autoimmune Rheumatic Disorder से संबंधित मरीज इस सर्वे में हिस्सा ले चुके हैं। अभी तक प्राप्त सर्वे से संबंधित एंट्री में Ankylosing Spondylitis के मरीजों की संख्या ज्यादा प्राप्त हुई है। AIRD 2023 में इन बीमारियों से पीडित मरीज (सर्वे फॉर्म) इस लिंक पर क्लिक कर हिस्सा ले सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय से मांगी गई है सहायता
Autoimmune Rheumatic Disease मरीजों को आसान और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके, इसके लिए caas india foundation की ओर से पीएमओ को पत्र लिखा गया था। जिसे पीएमओ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को फॉरवार्ड किया था। इस पत्र में ऐसे मरीजों की हालत को लेकर विस्तृत जानकारियां देने के साथ इसके महंगे उपचार का भी मुद्दा उठाया गया था। यह मामला स्वास्थ्य मंत्रालय के पास विचाराधीन है। जिसपर आने वाले समय में सार्थक पहल होने की उम्मीद की जा रही है।
मिलाप के माध्यम से समाज में फैलेगी जागरूकता
caas india foundation की ओर से हाल ही में मिलाप कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। इस कार्यक्रम की शुरूआत देश की राजधानी दिल्ली से की गई है। जिसके तहत क्षेत्रवार स्तर पर नुक्कड सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन सभाओं में मौजूद लोगों को इन बीमारियों के बारे में बताते हुए इससे पीडित कुछ मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री भी शेयर की जाती है ताकि लोग इन बीमारियों और इससे पैदा होने वाली गंभीरता को आसानी से समझ सकें। इस कार्यक्रम में कुछ चिकित्सकों का भी योगदान सराहनीय रहा है।
क्रिकेट के माध्यम से जागरूकता
संस्था AIRDs के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने के लिहाज से वार्षिक स्तर पर AIRD Trophy भी आयोजित करती है। जिसमें क्रिकेट के माध्यम से लोगोें को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। खिलाडियों, कॉलेज के छात्रों, विभिन्न स्पोर्ट्स क्लब के सदस्यों, पेशेवर संस्थानों सहित कई अन्य प्रकार के समूहों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है। साथ ही इन बीमारियों का उपचार करने वाले चिकित्सकों को भी जागरूकता की इस कडी में शामिल किया गया है। Autoimmune Rheumatic Diseases : मरीजों की डाइरेक्टी के लिए ऑनलाइन सर्वे
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